अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

दहेज

“दहेज अभिशाप हो रहा, करता नित नये खेल!
मरती नारी, जलती नारी, नहीं पा रही झेल!!
नहीं पा रही झेल, मानवता प्राणी सहेज!
नारी विहीन समाज क्या, बनाकर रहेगा दहेज??”
-सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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कुंडली

रवि दादा के तेज से, पसीना नहीं समाय !
जो निकला मैं बाहर तो, तन ये झुलसा जाय !!

तन ये झुलसा जाय, जी ना जी में समाय !
छाया तक-तक मैं हारा, छाया कहीं ना पाय !!

नीम की छाया तको, कहे ‘बिरकाळी’ कवि !
चारपायी लगाकर सोओ, तपे कितना भी रवि !!

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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