अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

बस यूं ही

*मैंने अपनों को देखा है !*

*परायों में बदलते हुए !!*

*मैंने परायों को देखा है !*

*खास अपना बनते हुए !!*

*चार दिन की जिन्दगी जो मिली !*

*खुशी से जी ले दोस्त !!*

*मैंने जिन्दगी को देखा है !*

*मौत में बदलते हुए !!*
– *सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’*

Advertisements
टिप्पणी करे »

बस यूं ही

*सुबह-सुबह*
उजली किरणों की सुनहरी रंगत,

स्पर्श हुई इस भंगुर तन पर ! 

मीटी तान गाकर चहचहाई गोरैया, 

बिस्तर तज *’बिरकाळी’* लग काम पर !!
*- सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’*

टिप्पणी करे »

%d bloggers like this: