अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

धर्म को धर्म रहने दें-1

पर्यूषण पर्व पर मांस बिक्री पर रोक संबंधि आदेश का विरोध कर शिवसेना नें अपने परंपरागत हिन्दु वोटों को बांट दिया है…
अब लोगों को लगने लग गया है कि ये वो शिवसेना नहीं है जो कभी हिन्दुरक्षक कहलाती थी…
बाल ठाकरे के अवसान के बाद शिवसेना के मूल स्वरूप का भी अवसान हो गया है…

Gulabkothari's Blog

इस देश में धर्म तो सनातन है। हजारों वर्षो से चला आ रहा है। उसको ही आज हिन्दू धर्म का जामा पहना दिया गया। नया शब्द चल पड़ा-हिन्दुत्व। धर्म की आड़ में हिन्दुत्व राजनीति का अखाड़ा बन गया। धीरे-धीरे प्रत्येक धर्म-समुदाय में राजनीति प्रवेश कर गई। जहां हजारों वर्षो में धार्मिक पर्वो-परम्पराओं को लेकर कभी राजनीति नहीं हुई, वहीं आज जैन पर्व पर लगी मांस की बिक्री पर रोक में राजनीति घुस गई। कुछ लोग तो इतने आक्रामक हो गए मानो स्वयं हिंसक हों। मांस के प्रति उनके मन में इतना राग, कि सभी धार्मिक सहिष्णुता द्वेष में बदल गई। मुम्बई में तो मानो कोहराम ही मच गया।

क्या इस कोहराम के पीछे जैन समुदाय था? क्या सरकार का आदेश सत्तर वर्षो में पहली बार आया? क्या आदेश जारी करने वाली पार्टी-भाजपा-के साथ शिवसेना भागीदार नहीं थी? तब क्या उद्धव ठाकरे का ऎलान राजनीति नहीं थी? क्यों एक-एक करके भाजपा…

View original post 415 और  शब्द

Advertisements
टिप्पणी करे »

%d bloggers like this: