अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

धर्मनिरपेक्षता

हमारे देश में अब तक धर्मनिरपेक्षता, साम्प्रदायिकता और कट्टरता को सही तरीके से परिभाषित नहीं किया गया है। जिन्होंने इसे परिभाषित किया है उन्हेंने सिर्फ अपने वोटों की खातिर इसे परिभाषित किया है।
धर्मनिरपेक्षता का अर्थ होता है कि अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्मों को भी उचित सम्मान प्रदान करना। धर्मनिरपेक्षता का मतलब ये नहीं होता कि किसी भी धर्म को न मानो।
साम्प्रदायिक होना गलत नहीं बशर्ते उससे अपने धर्म की रक्षा हो। अपने धर्म पर चलना और उसकी रक्षा करना ही साम्प्रदायिकता है।
यहां तो अपने धर्म को मानना साम्प्रदायिकता और दूसरे धर्म का समर्थन करना ही सेकुलरता मान लिया जाता है जो अनुचित है।
अगर सब धर्मों के लोग अपने धर्म का पालन करते हुए दूसरे धर्मों का उचित सम्मान करना सीख जाएं तो किसी प्रकार का झगङा ही नहीं रहेगा।
लेकिन ऐसा होना नामुमकिन है क्योंकि एक खास धर्म वाले ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके धर्म के अलावा इस धरती पर दूसरा कोई धर्म अस्तित्व में रहे।
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सतवीर वर्मा

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