अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

सुप्रभात

रात सुहागन चली
अपने पिय देश
चांद भी दुबक गया
अपनी रजाई में
टिमटिम तारे भी अब
नित्य कर्म में रत हुए
श्यामवर्ण अंधेरा भी अब
श्वेत धुंध में विलीन हुआ
शनैः शनैः पसार रही
श्वेत धुंध अपने पैर
भास्कर तेजहीन हुआ
धुंध तेजोमय हुई
मैं भी सोच रहा यहाँ
बाहर कैसे निकलूं
अच्छा लग रहा है
रजाई में बैठे बैठे
आप भी बैठे रहें।
– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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