अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

मंजिल

मञ्जिल है सामने
पैर दौङने को बेताब,
दिल में संदेह फिर भी
कैसे होंगे कामयाब?
.
जो व्यक्ति मंजिल के पास पहुंचकर ये विचारता है कि मंजिल तक का रास्ता तय करने पर कहीं सफलता न मिली तो क्या होगा, उसे कामयाबी कभी नहीं मिलती।

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फ्रीज में दिमाग

कल रात को मैं खाना खाकर सोने की कोशिश कर रहा था कि दरवाजे पर जोर जोर से हाथ मारने लगा। मैं डर गया कि कहीं कोई भूत वूत ना हो, इसलिए कुछ देर तक मेरी घिग्गी बंधी रही और मैं डर के मारे बिस्तर में दुबका रहा। जब मैंनें दरवाजा नहीं खोला तो बाहर से किसी कुत्ते की सी आवाज आयी- भैया, दरवाजा खोलिए।

मैंने पूछा- कौन हो तुम और इस समय क्या काम है?

बाहर से आवाज आयी- मैं हूँ आपका पङौसी राहुल। सब लोग मुझे प्यार से पप्पू कहते हैं और नफरत से पप्पिया कहते हैं। आप जल्दी से दरवाजा खोलिए, मुझे आपसे एक जरुरी काम है।

मैंने अनमने ढंग से दरवाजा खोल दिया। सामने हमारा पङोसी पप्पू (राहुल) खङा था। उसने अपने कंधे पर एक थैला लटका रखा था। आते ही कहने लगा- हमारा फ्रीज खराब हो गया है, क्या मैं आपका फ्रीज इस्तेमाल कर सकता हूँ?

मैं बोला- आप मोहल्ले के युवराज हैं, आपको हमारा फ्रीज इस्तेमाल करने की पूरी इजाजत है। मैं भला आपको मना कैसे कर सकता हूँ।

उसने मुझसे चोरी चोरी छिपते हुए अपने मोढे पर रखे थैले से पॉलिथीन में लपेटा हुआ (बारिश में भीगने से बचाने के लिए) बङा सा (बङे तरबूज के आकार का) अपना दिमाग निकाला।
मैंने बङे तरबूज जैसी चीज देखते ही फ्रीज की तरफ भागा और फ्रीज को बन्द कर दिया।

पप्पू नें मुझे अपने सामने देखते ही पहले तो अपना दिमाग थैले से ढंका (ताकि मैं देख ना लूं) और फिर बोला- भैया, पहले तो तुम कह रहे थे कि फ्रीज का इस्तेमाल कर लो, और अब इसे बन्द क्यों कर दिया? वैसे भी मैं इस मोहल्ले का युवराज होने के नाते मोहल्ले के घरों की सारी चीजेँ मुझे इस्तेमाल करने की छूट है।

मैं फ्रीज के आगे चट्टान की तरह डटा रहा और आवाज को थोङी नरम करते हुए बोला- मोहल्ले की सारी चीजें तुम्हारी हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम हमारे फ्रीज में अपना भैंसे जैसा दिमाग भी रख दोगे। अपना दिमाग रखने के लिए LG को बोलो कि कोई बङे खाने वाला स्पेशल फ्रीज बना दे। हमारे फ्रीज में तुम्हारा दिमाग रखने के लिए जगह नहीं है। रखोगे तो टोटे टोटे करके रखने पङेंगे।

इतना सुनते ही पप्पू के चेहरे पर बारह बज गये। होंठ लटकने लगे। होठों के ऊपर से गटर की अपवित्र धारा बहने लगी। धारा पप्पूमुख में समाने लगी। पप्पू के होंठ फैलने लगे और होठों के बीच दरार पैदा हो गयी। दरार चौङी होती गयी और उसके बीच से लावा की तरह तीव्र गंध मेरे नथुनों से टकराई। मैं समझ गया कि आगे क्या होने वाला है। मैं तुरन्त दौङकर अन्दर पूजा घर में गया और वहां रखी रुई को तुरन्त उठाकर अपने दोनों कानों में ठूंस लिया। तभी ठूंसी रुई के बीच से जबरदस्ती मेरे कानों में एक आवाज गूँजी… मम्मीईईईईईई…..

थोङी देर बाद आवाज बन्द हुई तो बाहर निकला। बाहर कोई नहीं था। मेरी जान में जान आयी। फ्रीज का निरिक्षण किया और सब कुछ ठीक पाकर बाहर आया।
पप्पू के घर से उठापटक की आवाजें आ रही थी। मैंने घर का मुख्य दरवाजा बन्द किया और चैन से सोने की कोशिश करने लगा।
– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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