अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

छठी इंद्री

अगर हम मन में ये धारणा बनाकर सोते हैं कि सुबह इतने बजे उठना है, तो ये पक्का निश्चित है कि सुबह के उसी समय हमारी नींद एक बार जरुर खुलती है। अब ये हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम आलस करके वापस सोते हैं या जाग जाते हैं। ये एक प्रकार का हमारी छठी इंद्री की तरफ से लगाया गया अलार्म ही होता है।

छठी इंद्री का सीधा सम्पर्क परमात्मा से होता है जो हमें सचेत रखने के लिए हर समय प्रयत्न करते रहते हैं। हम अगर परमात्मा के संकेतों को समझकर उसके अनुरुप कार्य करते हैं तो हम अपने कार्य में अवश्य सफल होते हैं, और अगर हम परमात्मा के इन संकेतों को व्यर्थ मानकर आलस्य में उङा देते हैं तो हमें अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पङता है।
– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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रामराज्य

राम राज्य एक काल्पनिक अवधारणा है जो पृथ्वी के किसी भाग में स्थापित नहीं हो सकता। चूँकि हर युग में अच्छे और बुरे इँसान अवश्य रहे हैं इसलिए ये जरुरी नहीं कि रामराज्य पूर्णरुपेण अपराध मुक्त रहेगा। पुराने जमाने में राक्षस थे और आज आतंकवादी और अपराधी है। रामराज्य में भी बुरी सोच वाले रावण खर दूषण थे और उन्हीं के राज्य में सीता पर कलंक लगाने वाले भी थे। जो अवधारणा एक कल्पना मात्र हो वो सत्य नहीं हो सकती।
– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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