अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

काश!

काश!
अमीर गरीब को समझता
संतान वाला यतीम
को समझता
खास आम को समझता
काश!
ऐसा होता तो
दुनिया में
ना कोई गरीब होता
ना वो दुत्कारा जाता
ना कोई यतीम होता
ना वो बहकाया जाता
ना कोई अमीर होता
ना वो घमण्डी होता
काश!
ऐसा होता तो
इन्सानियत से भरा होता
मानव व्याप्त संसार।
– सतवीर
वर्मा ‘बिरकाळी’

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कोई भरोसा नहीं क्षणभंगुर सूक्ष्म जीव का

कोई भरोसा नहीं
क्षणभंगुर
सूक्ष्म जीव का
कब चला जाए
छोङकर नश्वर शरीर
कोई पूर्व सूचना नहीं
ना कोई पूर्व संकेत
यकायक आता बुलावा
उस परमात्मा का
अधिकार नहीं टालने का
सूक्ष्म जीव को
परमात्मा के बुलावे को
जाना ही पङता है
छोङकर
सब पूर्ण या
अपूर्ण कार्य
हो सके तो
करो सम्पूर्ण
अपने कर्म अपूर्ण।
– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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