अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

अँग्रेजी नहीं सिखाती संस्कार

माता-पिता गुरु आत्मीय, दें सनातन ज्ञान।
बनके ना रह जाए कभी, बेटा पराए समान।।

अँग्रेजी नहीं सिखाती संस्कार, सिखाती है एकाकीपन।
स्वदेशी में दो शिक्षा, बेटा सीखेगा अपनापन।।

जागो मेरे भारतवासियों, अँग्रेजी को दूर भगाओ।
स्वदेशी को तुम अपनाकर, सनातन अलख जगाओ।।

बङे-बङे सब ज्ञानी-ध्यानी, हुए हैं भारत सपूत।
मत भुलाओ अपना इतिहास, बनो ना तुम कपूत।।

स्वदेशी में जो प्यार है, नहीं दे सकती विदेशी।
विदेशी हमें कमाना सिखाती, पर जीना सिखाती स्वदेशी।।

बेटा पढ-लिख गया विदेश, कमाई ढेर सी दौलत।
माँ-बाप बैठे गाँव में, मिलने की नहीं मौहलत।।

विदेश से बेटा लाया, एक अँग्रेजी मेम।
सास को देख वो बोली, व्हाट इज योर नेम।।

अँग्रेजी पढकर अफसर बना, गया पत्नी संग विदेश।
घर में माँ-बाप अकेले, पढें बेटे के संदेश।।

राम-कृष्ण को जानता नहीं, जानता एक येशू नाम।
अपनी संस्कृति भूलकर, करे याद संस्कृति तमाम।।

अँग्रेज छोङ गये अँग्रेजी, मोह में पङे भारतीय।
भूलकर अपनी स्वदेशी हिन्दी, बन गये अँग्रेज भारतीय।।

अँग्रेजी स्कूलों में सिखाते, अमेरिकन संस्कृति सारी।
कैसे हो नारी का सम्मान, देखेगा जब अर्धनग्न नारी।।

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रणचंडी बनो

दामिनी जगा गई भारत
वापस सो ना जाना
युवाओं के हाथ कमान
वापस छोङ ना देना।

एक दामिनी के लिए
खङा हुआ पूरा भारत
रोज कई दामिनीयों का
लुटता है मान सम्मान।

जली थी चिनगारी एक
बनानी है इसे अब आग
बुझने ना देना मेरे देशवासियों
जलाकर रखनी होगी आग।

शान्ति मार्च से कुछ होता
अब तक भारत शान्त होता
अब तो क्रान्ति करनी होगी
नई आशाएँ जगानी होंगी।

मोमबत्ती जलाना अच्छा है
पर दुष्कर्मी हृदय नहीं पिघलते
अंग भंग एक नीति है
दुष्कर्मियों की यही सजा है।

नेताओं की शह के साथ
करते मान मर्दन अबलाओं के
बनो रणचंडी अब तू अबला
मिलादे खाक में कुत्सितों को।

लातों के भूत जो होते
बातों से कब वो मानते
जोर का तमाचा पङे कान पर
तब इनको कुछ सुनाई देता।

आता है मुझको रोना
देखकर मेरे भारत की हालत
नारी पूजा करने वाले ही
नारी को हैं रौंदते।

सरकार कानून सो रहा
बुद्धिजीवि मरे पङे हैं
महिला मंडल नहीं देखती
कारण पर कोई नजर नहीं।

कारण तो कुछ जरुर है
बिना कारण परिणाम नहीं
सिनेमा मोबाइल बढाते अपराध
नहीं लगती इन पर रोक।

– सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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