अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

दूसरी दुनिया Doosri Duniya

आज प्रेम एस. गुर्जर की किताब दूसरी दुनिया पढ़ी, बहुत ही मोटिवेशनल कहानी है।

ठोकर खाकर ही सफलता की सीढी चढा जा सकता है, ये इस किताब में बखूबी दर्शाया गया है। मैंने इनकी पहली किताब फिलॉस्फर्स स्टोन पढ़ी थी और तब से ही इनकी लेखनी का कायल रहा हूं। इनकी लिखी यह किताब पाठक को अंत तक बांधे रखती है।
कभी कभी हमें लगता है कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए कोई चमत्कार, भाग्य या दैविय सहायता जरूरी होती है पर हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता है। जो भी भाग्य या किस्मत या चमत्कार होता है वो हमारे अन्दर ही छुपा होता है, बस उसे उभारकर बाहर लाने की जरूरत होती है। और एक बार जब अंदर की ताकत बाहर आ जाती है तो हम असफलता से सफलता की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

बहुत ही अच्छी कहानी है, पढना शुरू करेंगे तो पूरी करके ही उठेंगे ऐसा मेरा मानना है।

:- सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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सड़क बण्या पोखर

सरकार बणाई सीसी रोड़, गाम तरक्की खातर।
घरगां खूब ढोळ्यो पाणी, सड़क बणग्यो पोखर।।

आंवता-जांवता लोग लुगाई, पाईंचा पीड़गे चालै।
कीचड़ म्हं गाभा भरज्यै, साझन सड़कां चालै।।

सरकार बणाई मोटी नाळी, लोगां माटी भरदी।
कोझो पाणी सड़कां निकळै, माणस आ के करदी।।

‘बिरकाळी’ गी सड़कां बणगी, पाणी गो तळाव।
स्वच्छ गाम गा सपना दिया, कीचड़ म्हं मिळाय।।

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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