अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

बस यूं ही

रूठा जो सनम हमसे, मिन्नतें की बार बार! 

माना न फिर भी सनम, 

रोया दिल जार जार!! 

रोया दिल जार जार, हंसाया पर ना हंस सका! 

सनम भी इकबार हमसे, हंसकर न बोल सका!! 

हारकर दिल में गुस्सा आया, जो सनम के सिर पर फूटा! 

फिर झटके से मान गया, सनम था जो रूठा!! 

*सत्य*

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बस यूं ही

*मैंने अपनों को देखा है !*

*परायों में बदलते हुए !!*

*मैंने परायों को देखा है !*

*खास अपना बनते हुए !!*

*चार दिन की जिन्दगी जो मिली !*

*खुशी से जी ले दोस्त !!*

*मैंने जिन्दगी को देखा है !*

*मौत में बदलते हुए !!*
– *सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’*

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