अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

ययाति

ययाति – विष्णु सखाराम खांडेकर

एतिहासिक पात्रों को आधार बनाकर लिखा गया खांडेकर जी का यह उपन्यास बहुत ही चर्चित है. ययाति, कच, देवयानी, शर्मिष्ठा के इर्द गिर्द पूरी कहानी का निर्माण किया गया है. सब पात्र अपनी कहानी खुद ही कहते हैं और इसमें खांडेकर जी पूरी तरह सफल हुए हैं.

मूल रूप से मराठी में लिखे उपन्यास का यह हिन्दी अनुवाद है जो मोरेश्वर तपस्वी नें किया है पर यह कहीं नहीं लगा कि यह एक अनुवादिक रचना है.

उपन्यास की भाषा शैली पूर्ण रूप से सरल है. कठिन शब्दावली का प्रयोग न के बराबर है. एब बार पढने बैठो तो पूरा करके ही उठने का मन करता है. हालांकि कहीं कहीं यह बोरिंग भी करती महसूस होती है पर कहानी फिर से अपनी पकड़ बना लेती है.

ययाति इनके पिता नहुष को इंद्राणी से श्राप मिला कि तुम्हारे बच्चे कभी सुखी नहीं रहेंगे…यति बचपन से ही घर से भाग गया सुख की तलाश में जो कभी योगी बना कभी पागल हो गया पर सुख नहीं मिला…
ययाति लंपट किस्म का पात्र है. पहले मुकुलिका, फिर अलका, फिर देवयानी, फिर शर्मिष्ठा और फिर अनगिनत लड़कियों के साथ रंगीनियां इसके जीवन को अधोपतन की ओर ले जाती है पर कहानी के अंत में कच द्वारा ययाति का उद्धार होता है…

देवयानी देवयानी राक्षस गुरू शुक्राचार्य की पुत्री है जो अपने पिता द्वारा तपस्या से अर्जित की गयी उपलब्धियों के कारण घमण्डी किस्म की है. राक्षसराज वृषपर्वा की पुत्री और राजकुमारी शर्मिष्ठा से भयंकर जलन रखती है. शर्मिष्ठा के हाथों हुई एक दुर्घटना के कारण ययाति देवयानी को अपनी पत्नी बनाता है और देवयानी बदला लेने के लिए शर्मिष्ठा को अपनी दासी जिसे मजबूरी में सबको स्वीकार करना पड़ता है. देवयानी के अभिमानी व घमण्डी स्वभाव के कारण ही ययाति पहले शर्मिष्ठा की ओर आकर्षित होता है और बाद में वह लंपट बन जाता है.

शर्मिष्ठा यह राक्षसराज वृषपर्वा की पुत्री और राजकुमारी है. देवयानी की दाषी बनने के बाद देवयानी इसे हर अवसर पर नीचा दिखाने की कोशिश करती है. अपमानित शर्मिष्ठा को देवयानी द्वारा दुत्कारित ययाति का साथ मिलता है. शर्मिष्ठा का स्वभाव संयमित है, पर देवयानी को इतना क्रोध आता है कि वह शर्मिष्ठा को मरवाने का आदेश दे देती है. पर वह ययाति की कृपा से बच निकलती है…

कच एक तपस्वी व देवताओं को शुक्राचार्य की संजीवनी बूटी से बचाने वाला बताया गया है. देवयानी व शर्मिष्ठा दोनों ही उसे प्रेम करती है पर वह इन दोनों से दूर रहता है. सही मायने में यही सबका उद्धार करता है….

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ययाति एक भावनात्मक उपन्यास है जो हर पात्र के मानसिक विचारों को खोलकर रख देता है.

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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मास्टरमाइंड

मास्टमाइंड – शुभानन्द

अभी अभी मास्टरमाइंड पढकर खत्म करी है… बहुत ही रोमांचक उपन्यास है. शुभानन्द सर की कलम से निकली कहानी कहीं भी बोर नहीं करती और एक बार पढना शुरू करने के बाद पूरा करके ही उठने को मन करता है.

जावेद-अमर-जॉन की जोड़ी खूब जंची है. रिंकी भी इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती दिखी. रिंकी की अमर के साथ दुकड़ी देखकर मुझे लग रहा रहा था कि इसे J A J R सिरीज में लिखने की योजना होगी.

मास्टरमाइंड का रहस्य अंत तक बना रहा. कहानी बीच बीच में कई मोड़ लेती हुई मास्टरमाइंड का इशारा दूसरी तरफ कर देती थी और अंत में भी यही लगा था कि मास्टरमाइंड कोई और है और कहानी का असली मास्टरमाइंड उसका मोहरा मात्र है. कहानी वाकई में रहस्य की परतों से लबरेज है जिसे जावेद-अमर-जॉन के साथ रिंकी की चौकड़ी मिलकर उधेड़ डालती है. जावेद जैसा खुर्राट जासूस भी जिके प्लान में फंस जाए वह वाकई में जबरदस्त गेमर होगा…

मेरा तो एक ही मशवरा है कि जिसने भी इसे नहीं पढा है वह एक बार इसे पढे जरूर…

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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