अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

मोदी अबतौ मानजा

मोदी अबतौ मानजा
राजस्थानी मान्यता री बात प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नैं पौचावा वास्ते दूवा छंद में शतक लिखियौ। जै भारत जै राजस्थान जै राजस्थानी।
ओबामा अपणायली,जबरी भाषा जांण।
मोदी अब तौ मानजा,रीसै राजस्थाण।।1।।
जग आखौ तौ जांणली,ठावी अर ठरकाळ।
मोदी अब तौ मानजा, प्रीत पुराणी पाळ।।2।।
अनुसूची वा आंठवी,अर्जुन वाळी आँख।
मोदी अब तौ मानजा,रामाधरमी राख।।3।।
मायड भाषा मानता,नेकी कर थूं नेक।
मोदी अब तौ मानजा,औ ईज मांगां एक।।4।।
पलकडाक सूं पावती,आवती अणमाप।
मोदी अब तौ मानजा,पाछै लागै पाप।।5।।
जगतपौसाळां जच रयी,भणरया मोट्यार।
मोदी अब तौ मानजा,या मांग छै यार।।6।।
रंगीला रजथान री,औळख नीं अणजांण।
मोदी अब तौ मानजा,मायड भाषा माण।।7।।
साफौ बांधौ शान सूं,कोट पैरौ करधार।
मोदी अब तौ मानजा,अंतस रौ आधार।।8।।
धौरा जिणमें धड़कता,अडग आडावळ आय।
मोदी अब तौ मानजा,म्हारी भाषा माय।।9।।
सुरसत धारां सरसती,वेद वाणी वणवाय।
मोदी अब तौ मानजा,दिव्य-इंगरा दाय।।10।।
रामापीर रळियावणौ,गौगाजी गवराय।
मोदी अब तौ मानजा,आखा धौखै आय।।11।।
कल्ला री कीरत कहै,देवनारायण दाय।
मोदी अब तौ मानजा,पग पग परचा पाय।।12।।
घूमर नैं दुनियां गिणै,टॉप टैन में टाळ।
मोदी अब तौ मानजा,रैत मत थूं राळ।।13।।
अमरीका तौ आदरै,टणकी तैरै टाळ।
मोदी अब तौ मानजा,मिणिया फेरां माळ।।14।।
तेजौ गावै तीठ सूं,हळौतियै हाळी।
मोदी अब तौ मानजा,तुरत खोल ताळी।।15।।
ढौल वाहरू ढमकता,गवरी खेल घणाह।
मोदी अब तौ मानजा,जोवै जणा जणाह।।16।।
लंगा देश विदेश लग,गावै गीत घणाह।
मोदी अब तौ मानजा,जगत ख्यात जणाह।।17।।
मांगणियार मांनीजिया,संगीत में सैंठाह।
मोदी अब तौ मानजा,दुनियां में दोटाह।।18।।
आवड करणी आज लग,पाबू तौ प्रणपाळ।
मोदी अब तौ मानजा,साहित्त री आ साळ।।19।।
गरू गौरख गावीजियौ,जसनाथ जसजौग।
मोदी अब तौ मानजा,लाखूं पूजै लोग।।20।।
जंभवाणी नैं जाणगी,पर्यावरण पौसाळ।
मोदी अब तौ मानजा,विरछ री रखवाळ।।21।।
करसा गावै कौड सूं,भिणत मांय भगवान।
मोदी अब तौ मानजा,भौळां रै भगवान।।22।।
कक्कौ गावां कौड रौ,वाणी रौ वणाव।
मोदी अब तौ मानजा,पाछा मत दै पांव।।23।।
वोट घणा वरसाविया,लाजां मरता लोग।
मोदी अब तौ मानजा,भाषा नैं दै भोग।।24।।
वद वद गावां वाणियां,रीझां हरजस राग।
मोदी अब तौ मानजा,गूढमलारां राग।।25।।
विदविद वाजा वाजतां,अंतस में ऊमाव।
मोदी अब तौ मानजा,दुनियां मांनै दाव।।26।।
डीडवाणा री देखलौ,जूनी ख्यात जोय।
मोदी अब तौ मानजा,लाख बरस री लोय।।27।।
पुरातत्वी पांत में,ठावी दुनियां ठांण।
मोदी अब तौ मानजा,रिगवैद में राण।।28।।
मिनख जमारौ जौयलौ,ख्यातदीठ री खांण।
मोदी अब तौ मानजा,सुरसत रै सैनांण।।29।।
अँगरेजी कठै अडै,हिन्दी नैं नीं हाँण।
मोदी अब तौ मानजा,म्हारी भाषा माँण।।30।।
गरब करै गुजरात रा,मायड भाषा मांण।
मोदी अब तौ मानजा,जीवाजूंण नैं जांण।।31।।
म्हारला तौ मुलक में,विणज करै वौपार।
मोदी अब तौ मानजा,पड़ै न भाषा पार।।32।।
माथा दैवां मुलक में,अंजस रै उनमान।
मोदी अब तौ मानजा,मत कर थूं अपमाँण।।33।।
थांरै म्हांरै थाट छै,जूनी कविता जौड।
मोदी अब तौ मानजा,हूँकारा री हौड़।।34।।
बडीपौसाळ बणायदी,भुज लखपत भूपाळ।
मोदी अब तौ मानजा,टणकी नैं मत टाळ।।35।।
पातल जिणमें पांगरियौ,मीरां छी मतवाळ।
मोदी अब तौ मानजा,भारतपण नैं भाळ।।36।।
माथा दीधा मौद सूं,अलेखूं अखियात।
मोदी अब तौ मानजा,ख्यातां में विख्यात।।37।।
गांम गांम में गंवळियां,खेतपाळ रखवाळ।
मोदी अब तौ मानजा,पूजण जोगी पाळ।।38।।
चिरजा गावां चा’व सूं,देवी रै दरबार।
मोदी अब तौ मानजा,सरल बात में सार।।39।।
मरूगूजरी मांयला,ताता जुड़िया तार।
मोदी अब तौ मानजा,या एक छै यार।।40।।
विडियो वाळी वारता,आडियौ अणूंताह।
मोदी अब तौ मानजा,पढेसरी पाताह।।41।।
ब्लाँग तणी तौ बाढ,इण भाषा में आयगी।
मोदी अब तौ मानजा,पलकपता पायगी।।42।।
पड़ती धुडती पौचगी,यू ट्यूब में यार।
मोदी अब तौ मानजा,सगळौ कै संसार।।43।।
तरकस वाळा तीर तौ,ट्वीटर तक तणिया।
मोदी अब तौ मानजा,भोमिया भििडय़ा।।44।।
फेसबुक रा फाळ में तौ,फूठरी फूलमाळ।
मोदी अब तौ मानजा,म्हारी माँ मतवाळ।।45।।
लिंकेडिन में लायदी,हाईक लाईन हाय।
मोदी अब तौ मानजा,अंतरजाळ में आय।।46।।
खबरां मांय ख्यात छै,तगड़ी टीवी तांय।
मोदी अब तौ मानजा,रेडिया री राय।।47।।
दूरदर्शण में देखलौ,आखा जग अखियात।
मोदी अब तौ मानजा,रोज दिन अर रात।।48।।
आपणी खबर आयगी,ईटीवी में आय।।
मोदी अब तौ मानजा,आथन पैली आय।।49।।
ईटीवी में आज तक,चौई घड़ी में पाँच।
मोदी अब तौ मानजा, खरी बात मत खांच।।50।।
आथन खबरां आयजा,फस्ट इण्डिया ई फस्ट।
मोदी अब तौ मानजा,रोज बाज रयी रट।।51।।
सब बौलै अब शान सूं,खबरां मांयनै खट।
मोदी अब तौ मानजा,कातिल मारयौ कट।।52।।
घड़ी घड़ी गांम गांम,एफ एम री आवाज।
मोदी अब तौ मानजा,करदै म्हांरौ काज।।53।।
एलबम बणै अणूंता,गिणै कुंण हर गांम।
मोदी अब तौ मानजा,कलाकृति रौ काम।।54।।
आयौडा अडाय दियौ,लिपियां रौ लपडौ।
मोदी अब तौ मानजा,झूटौ छै झगड़ौ।।55।।
मानक भाषा माहरी,देखौ साहित्त दाय।
मोदी अब तौ मानजा,अकादमी में आय।।56।।
चौईस भाषा में चौधरी,भारत भाषा मांय।
मोदी अबतौ मानजा,आदर साथै आय।।57।।
चार दसक सूं चाल री,आदर री आवाज।
मोदी अबतौ मानजा,साहित्त में सरताज।।58।।
सगळी भाषा साथ में,सिरै मिलै सम्मान।
मोदी अबतौ मानजा,मायड भाषा मान।।59।।
जिण गरभ सूं जनमगी,जबरी गूजर जांण।
मोदी अबतौ मानजा,काढ मती रे काँण।।60।
गरब करै गुजरात रा,म्हारां मन में मौळ।
मोदी अबतौ मानजा,राष्ट्रभाव सूं रौळ।।61।।
वीर भाव मन भावतौ,आ म्हारी छै औळ।
मोदी अबतौ मानजा,राखौडा री रौळ।।62।।
वीर भाव री वारता,वीर भाव रा बोल।
मोदी अबतौ मानजा,खरी आँख्यां खोल।।63।।
मायड भाषा मांयनै,शिक्षा मन सुहा’वती।
मोदी अबतौ मानजा,आ ईज आशा आपती।।64।।
संस्कृति संस्कार सूं,केसरिया किलोळ।
मोदी अबतौ मानजा,आ आछौडी औळ।।65।।
जिण प्रांत में जनमती, लोकदेवता लोय।
मोदी अबतौ मानजा,माँ भाषा में मोय।।66।।
सबद निठै छै सांवठा,रोज रोज रा रोय।
मोदी अबतौ मानजा,हांण अणूंती होय।।67।।
जगतपौसाळ जांचली,आखा जग री आय।
मोदी अबतौ मानजा,सोधेसरां सुहाय।।68।।
दुनियां आखी देखलौ,भणेसरां भणवाय।
मोदी अबतौ मानजा,घरमें लागै गाय।।69।।
दुनियां दौड़’र दैखलौ,पाण्डुलिपि रौ पाठ।
मोदी अबतौ मानजा,मिलसी कठै’न माठ।।70।।
लाखूं पोथियां लायदी,ख्यांतकार कर ख्यांत।
मोदी अबतौ मानजा,बात मांनलै बात।।71।।
सोधेसर केई समायगा,करतां उमर ख्यांत।
मोदी अबतौ मानजा,संकळप थांरै साथ।।72।।
दोय सौ रा दोय सौ,प्रस्ताव कीधौ पास।
मोदी अबतौ मानजा,आ ईज थांसू आस।।73।।
पत्रिकावां केई पांगरी,साहित्त तणै समाज।
मोदी अबतौ मानजा,आनलाईन छै आज।।74।।
अखबार केईक आयगा,इण भाषा में आज।
मोदी अबतौ मानजा,कालम लिखवौ काज।।75।।
पानां काढै पांतरै, करै केई औ काज।
मोदी अबतौ मानजा,गिरती रैवै गाज।।76।।
साहित्तकार सांवठा,साहित्त तणौ समाज।
मोदी अबतौ मानजा,आदर करदै आज।।77।।
बोर्ड मांयनै बांचतां,दसक चार दरसाव।
मोदी अबतौ मानजा,पौसाळ देतां पाव।।78।।
कानून बणियौ कौड सूं,अनिवार्य शिक्षा आय।
मोदी अबतौ मानजा,मायड भाषा मांय।।79।।
इण कानून री आतमा,मन री कैवै मोय।
मोदी अबतौ मानजा,रोज रोज ई रोय।।80।।
उच्छब कोई व्हैै ओपतौ,दुनियां देखौ दाय।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा म्हारी भाय,।।81।।
घूमर लूरां गावतां,गवरी री घमरोळ।
मोदी अबतौ मानजा,आदरीजती औळ।।82।।
गीत गाण में गजबरा,अंतस उठै इलोळ।
मोदी अबतौ मानजा,पूजीजै आ पौळ।।।83।।
मुड़िया मोड़ी माजनी,जग आखै जणवाय।
मोदी अबतौ मानजा,मरूगूजरी माय।।84।।
लाखूं ग्रंथ लिखिया लखौ,इण लिपि में आय।
मोदी अबतौ मानजा,पीढ़ी पीढ़ी पाय।।85।।
देवनागरी दाखवै,इण जुग में अपणाय।
मोदी अबतौ मानजा,साहित्त वैल सरसाय।।86।।
शौध संस्थानां सड़ रया,लिखिया देखौ लाय।
मोदी अबतौ मानजा,ग्रंथ गांगरत गाय।।87।।
झूठी बातां जांणकर,राज कांणकी रीत।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा आडी भींत।।88।।
गैळीजै गुजरात रा,डिंगळ री डणकार।
मोदी अबतौ मानजा,भुज थारै औ भार।।89।।
राष्ट्रवादी रीत रा,पुन्न घणा पसराय।
मोदी अबतौ मानजा,राजस्थानी राय।।90।।
म्हारा गूंगा मानवी,बोलां सूं बोलाय।
मोदी अबतौ मानजा,जनतंतर जणवाय।।91।।
इंग्लैंड अमरीकी, अँगरेजी उळझाय।
मोदी अबतौ मानजा,जग आखा में जाय।।92।।
चार तरै लिखत चावी,वरणमाळ वणवाय।
मोदी अबतौ मानजा,आ अँगरेजी आय।।93।।
भाषा जावै भागती,अँगरेजी आगै।
मोदी अबतौ मानजा,मायड कीं माँगे।।94।।
लोकभाषा रै लाय रौ,लांपौ लगवायौ।
मोदी अबतौ मानजा,आछौ टैम आयौ।।95।।
आजादी री आंण छै,लोकतंत्र री लाज।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा सूं मत भाज।।96।।
मोटा प्रांत री मानता,इंडिया मांही आज।
मोदी अबतौ मानजा,गूंगां वाळी गाज।।97।।
आंण दिराऊं आपनै,इण धरती री आज।
मोदी अबतौ मानजा,कर भाषा रौ काज।।98।।
जग आखौ तौ जांणगौ,मरुभाषा री माझ।
मोदी अबतौ मानजा,दिल में लागै दाझ।।99।।
प्रजातंत्र री पांत में,कुरसी वाळी काँण।
मोदी अबतौ मानजा,अब गाँधी री आंण।।100||
भलापणौ भामा तणौ,पातल रौ परताप।
मोदी अबतौ मानजा,तळीजगा इण ताप।।101।।
दुरगौ चूंडौ दीसता,भीषम ज्यूं ई भाख।
मोदी अबतौ मानजा,खूंटा छांणै खाख।।102।।
आजादी खातर अड़्या,बडा भील बबरैल।
मोदी अबतौ मानजा,ठावी बातां ठैल।।103।।
धक धक करता धोरिया,आडावळ अरड़ाय।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा माँगे भाय।।104।।
आंरा मूंडा उतरिया,रुंख फूल सब रोय।
मोदी अबतौ मानजा,म्हारी भाषा मोय।।105।।
मान बुजरगां मिट रह्यौ,माँ भाषा बिन मान।
मोदी अबतौ मानजा,कद पकड़सी कान।।106।।
कंवळा टाबर कट रह्या,संस्कृति संस्कार।
मोदी अबतौ मानजा,सबद मानलै सार।।107।।
रजथानी माटी रयी,राष्ट्रवाद री राग।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा फूटा भाग।।108।।
सत त्याग संस्कार रौ,आदर करदै आज।
मोदी अबतौ मानजा,भाषा सूं मत भाज।।109।।
शिक्षा कानून सड़ गयौ,मरी राज मरजाद।
मोदी अबतौ मानजा,बाळक व्हैै बरबाद।।110।।
भणै जगत भणेसरी,माँ भाषा रै मांय।
मोदी अबतौ मानजा,आशा पूरदै आय।।111।।

डाँ.राजेन्द्र बारहठ

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राजू सिंधी कुल्फीवाला

Raju Kulfiwala

जब हम बच्चे होते हैं तब हमें ये मालूम नहीं होता कि हम अपने जीवन के कितने अनमोल पल जी रहे हैं. हम बस उन पलों को जी रहे होते हैं बिना इस बात को जाने कि बड़े होने पर यही पल हमें याद आ आकर हंसाएंगे, गुदगुदाएंगे, रुलाएंगे. ऐसा ही हमारा बचपन बीता था. बिना किसी बात की चिंता के. कोई काम की चिंता नहीं, कोई पैसों की चिंता नहीं, न दिन की टेंशन न रात की टेंशन. जो थोड़ा बहुत स्कूल से होमवर्क मिलता उसे सब मिलकर जल्दी से जल्दी निपटाने की प्रतियोगिता करते थे. खेलने की जल्दी जो रहती थी. गर्मी हो या सर्दी, खेलने के लिए कभी आड़े नहीं आती.

बड़ी बहन और बड़े चाचा के दोनों लड़कों के साथ हमारी चौकड़ी रहती थी. कभी बुआ आती थी तो उनके लड़कों के साथ दिनभर खेलते थे. हमें छोटे दोनों चाचा बहुत डांट लगाते रहते पर हम कहां मानते थे. उनके नजरों से ओझल होते ही फिर लग जाते थे. गिल्ली डंडा, आईस पाईस, हाथ लगाई, पीठू, मारदड़ी, घूता लाठी, कुरां-कुरां, चोर सिपाही ये हमारे रेगुलर खेल थे.

गर्मियों की छुट्टियों में भरी दुपहरी में जब सब घरवाले सोते रहते थे तब हम खेलते रहते थे. और इस बीच अगर कहीं पोंपी… पोंपी की आवाज सुनाई दे जाती तो सब ”राजू आ गया कुल्फी वाला” आवाज लगाते हुए दौड़ जाते उसकी तरफ. किसी के हाथ में पुरानी कापियां, किसी के हाथ में खाली बोतल, किसी के हाथ में पैसा रहता, कोई पुराना लौह कबाड़ चुनकर रखता उसके लिए.

उसका नाम राजू सिंधी था. 22 किलोमीटर दूर नोहर कस्बे से वह सुबह 9 बजे की बस से हमारे गांव बिरकाली आ जाता और यहां दिनभर गांव में घूमकर सामान बेचकर शाम 5 बजे की बस से वापस नोहर चला जाता. वह एक पुरानी साईकिल पर पीछे कैरियर पर कुल्फी का बड़ा बॉक्स जो वह कस्बे से ही लेकर आता था, साईकिल के टायर की ट्यूब से बांध लेता था. दिनभर वह पूरे गांव में पैदल घूमकर कुल्फी बेचता था. जब से हमने उसको देखा था तब से लेकर बड़े होने तक वह उसी साईकिल पर गर्मियों में कुल्फी बेचा करता था. सर्दियों में प्लास्टिक का सामान, कुछ स्टील के बरतन बेचता था. बदले में ज्यादातर उसे कबाड़ ही मिलता था. आमदनी पता नहीं कितनी होती थी पर आज भी जब मैं गांव जाता हूं तो उसको उसी तरह साईकिल पर कुल्फी बेचते हुए पाता हूं. इससे इतना तो अनुमान लगा ही लेता हूं कि 20 साल तक वह इसी तरह अपने परिवार का पेट पालता आ रहा है. हालांकि उसका नोहर कस्बे में स्थित घर देखकर कोई अनुमान नहीं लगा सकता कि वह साईकिल पर कुल्फी बेचता है फेरी लगाकर. बच्चे भी बढिया तरीके से पढ लिख रहे हैं. बस खुद की जिन्दगी में कोई परिवर्तन नहीं होने दिया अब तक.

बचपन का भी अपना मजा होता है. शरारतें तो खून में रहती थी. जैसे ही मौका मिलता, शरारतें करने के लिए कोई न कोई मिल ही जाता था. और शरारत करने के लिए राजू कुल्फीवाला मिल जाए तो कहना ही क्या. वैसे भी उसे चिढाने का हम कोई मौका छोड़ते नहीं थे. राजू के पिताजी का नाम मूलाराम था और हम सब उसे ‘मूळे का बीज’ (मूली/मूळी का पुल्लिंग मूला/मूळा) कहते थे. हमारे ऐसा कहकर चिढाने पर वह छड़ी लेकर हमारे पीछे दौड़ता था. तब तक पीछे से एक दो कुल्फी उसकी पेटी से पार हो जाती. वह बड़बड़ाकर पता नहीं क्या क्या कहता रहता और हम हंसते रहते अपनी शारारत की सफलता पर.

एक बार मुझे दस रुपये का आधा फटा नोट मिला जिसका आधा हिस्सा गायब था. आधा था तो क्या हुआ, था तो दस का नोट ही, मैंने उठा लिया. दस रूपये की कीमत तब आज से पांच गुना थी. यानि दस रुपये की तब दस कुल्फी आ जाती थी पर आज तो दो ही आती है. मैंने इस पर विचार करना शुरू कर दिया कि इसका क्या उपयोग किया जा सकता है. आधा नोट तो कोई भी नहीं लेगा. मोड़कर दूंगा किसी को तो भी वह सीधा करेगा तो असलियत सामने आ जाएगी. कुछ ना कुछ तो जुगाड़ लगाना पड़ेगा.
फिर शातिर दिमाग में धांसू आयडिया आया. घर में अपनी पर्सनल तिजौरी में भारतीय मनोरंजन बैंक का चूर्ण की पुड़िया में निकला हुआ दस का नोट पड़ा था. तुरन्त ही आधे दस के नोट को पूरा करने के अभियान में जुट गया. पहले तो दोनों नोट के साइज का मिलान किया. फिर आधा नोट कट करके जो थोड़ा ओवर साइज था उसे काट कर मिलाया. अब परेशानी ये थी कि असली नोट पुराना था और मनोरंजन वाला नया कड़क. नये को पुराने में मिलाने के लिए मैंने उसे तेल में डुबोकर सुखाया जिससे दोनों का रंग मटमैला जैसा हो गया और फिर नये को मुट्ठी में लेकर भींच दिया इससे उसमें सलवटें भी पड़ गयी. अब दोनों में अंतर बहुत कम रह गया था. अब मैंने दोनों को बीच से गोंद से चिपकाकर धूप में सुखा दिया. सूखने के बाद नोट को देखा तो निश्चिंत हो गया कि राजू इस नोट की कुल्फी देने से इंकार नहीं कर सकेगा. अब मेरे कान बस एक ही आवाज सुनना चाह रहे थे…पों…पी… पों..पी…की आवाज.

दोपहर को आखिरकार वह आवाज सुनाई दे ही गयी गली में. जेब में रखे दस के खरे नोट को महसूस करता हुआ बाहर गली में भागा. राजू कुल्फीवाला गर्मी में पसीना पोंछते हुए आ रहा था. साईकिल के हैंडल पर बंधी पों’पली बजाते हुए. दिल की धड़कन भी तेज थी कि कहीं उसको पता चल गया तो छड़ी लेकर पीछे भागेगा. हिम्मत करके उसके पास गया और नोट को दोलड़ा (मोड़कर) करके असली वाला ऊपर दिखाकर बोला,
“राजू, दो कुल्फी दे दो.”
उसने नोट को देखकर कहा, “ये नहीं चलेगा. पता नहीं कहां से लाया है.”
दिल बैठने लगा कि कहीं उसे पता न चल जाए कि असली नकली का जोड़ है इसलिए तपाक से बोला, “रात को दीये में तेल डाल रहा था इसलिए नोट पर गिर गया. बाकी फटा हुआ तो बिलकुल नहीं है देख लो.”
उसे शायद इस बात का अनुमान नहीं था कि उसके साथ शारारत हो रही है इसीलिए उसने एक नजर नोट पर डाली और बड़बड़ाते हुए नोट जेब में डाल लिया. कसम से जग जीतने जैसी खुशी हासिल हुई. उसने जैसे ही कुल्फी दी तुरन्त बाकी के छुट्टे लेकर घर की तरफ भाग लिया कि कहीं पीछे से आवाज न दे दे. ऐसी थी राजू कुल्फीवाले के साथ मेरी पहली शरारत.

हालांकि अब जब भी वो बात याद आती है तो अफसोस होता है कि राजू के साथ वैसा नहीं करना चाहिए था पर बचपन में जो शरारत हम न कर गुजरें वो कम ही है.

मैं आज जब भी गांव जाता हूं तो राजू कुल्फी वाले को देखकर सोचता हूं कि उसमें और हममें क्या अंतर है. वह आज भी अपनी एक जैसी जिन्दगी जी रहा है और हम पता नहीं बेहतर जिन्दगी की तलाश में न जाने कहां कहां भटक रहे हैं. उसके जीवन में मैंने संतोष की एक झलक देखी है.

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

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