अंतस के उद्गार

@ शान्ति मन्त्रः- @"ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षम् शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वम् शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।"

कुछ किस्से Bits Pilani कैंटीन से

कुछ किस्से Bits Pilani कैंटीन से

लेखक – चिराग खत्री
प्रकाशक – अंजूमन प्रकाशन
मूल्य – ₹ 125

चिराग खत्री के उपन्यास को देखकर मुझे लगा था कि यह बिट्स पिलानी की कैंटीन में बनने वाले किस्सों पर आधारित किताब होगी, पर इसे पढने से यह निर्मूल साबित हुई. यह किस्से कैंटीन में कहे गये हैं पर असल में यह हमारी जिन्दगी से जुड़े हुए हैं बशर्ते हम किसी से प्यार करते हों. इससे पहले मैंने मिथिलेश गुप्ता की प्रेम वाली कहानियां पढ चुका हूं और उनमें और इन किस्सों में मुझे ज्यादा फर्क नजर नहीं आया.
फर्क सिर्फ इतना था कि चिराग जी नें पांच दोस्तों को कैंटीन में बिठाकर किस्से कहलवाए हैं.

इस किताब के सातों किस्सों में से दो किस्से ऐसे थे जिनमें लेखक नें अंधविश्वास और धर्म पर चोट की है लेकिन यह इकतरफा चोट है जो मेरे जैसे बहुत से पाठकों को पसंद नहीं आएगा.

आप अगर दो धर्मों के पात्र लेकर किस्सा गढते हैं तो किसी एक धर्म को अंधविश्वास का पुजारी बताकर दूसरे धर्म को महान बताना आपकी लेखकीय योग्यता पर सवाल खड़े करता है, क्योंकि अंधविश्वास हर धर्म का मूल तत्व है.

चूंकि लेखक नें अन्य किस्सों में बहुत अच्छा लिखा पर इन दो किस्सों में लेखक की मानसिकता और सोच के प्रति मेरी तरफ से नेगेटिव मार्किंग दी जाएगी

चूंकि एक युवा द्वारा युवाओं के लिए लिखी किताब युवाओं को अवश्य पसंद आएगी… खासकर कॉलेज के उन युवाओं को जो प्रेम और इश्क में पड़कर ऐसे किस्सों की रचना करते हैं.

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

Advertisements
1 टिप्पणी »

कौवों का हमला Kauvon Ka Hamla

कौवों का हमला

लेखक – अजय कुमार ‘रावण’

आहट, सीआईडी, लापतागंज जैसे सीरियलों की कहानियां लिखने वाले अजय जी पहली बार अपनी कहानी को पेपरबेक में लेकर आए हैं. कौवों का हमला बाल मनोविज्ञान से भरपूर बाल उपन्यास है जिसे बड़े भी बड़े ही चाव से पढ सकते हैं. उन्नत जो अपने को किसी खुर्राट जासूस से कम नहीं समझता, इस उपन्यास का हीरो है. उसका साथ देने के लिए उसकी बहन आशी हमेशा उसके साथ रहती है. दोनों बच्चों में भाई बहन वाली नोंकझोंक भी बखूबी होती है. लेखक नें किताब में दोनों के मनोविज्ञान को इतनी अच्छी तरह दिखाया है कि लेखक के इस क्षेत्र में परिपक्व होने का अहसास होता है…

ये दोनों अपने प्यारे कुत्ते मूलचंद को कौवों के हमले से किस प्रकार बचाते हैं यह सब घटनाक्रम आपको किताब पढने पर ही समझ आएगा कि अपने दोनों जांबाज जासूस उनन्त और आशी कितने काबिल और बहादूर हैं…

मैं तो कहता हूं इस किताब को हर पापा अपने बच्चे को पढवाए ताकि वह भी बहादुर बने…

सतवीर वर्मा ‘बिरकाळी’

टिप्पणी करे »

%d bloggers like this: